Types of mutual funds in India PPT & PDF download

types of mutual funds in india
types of mutual funds in india

Types of mutual funds in India (भारत में म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार): म्यूच्यूअल फंड्स में पैसा निवेश (Invest) करना बहुत इस आसन है और म्यूच्यूअल फंड्स में पैसा निवेश (Invest) करके हम अपने पैसे से काफी ज्यादा मुनाफा कमा सकते है और इस बचाए हए पैसे को हम अपने भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं|

अपनी पिछली पोस्ट में हमने बताया था कि म्यूच्यूअल फंड्स क्या होते हैं और इस लेख में हम जानेंगे की म्यूच्यूअल फंड्स कितने प्रकार के होते हैं|

वैसे तो म्यूच्यूअल फंड्स बहुत प्रकार के होते हैं लेकिन मुख्यत ये तीन प्रकार के होते है इक्विटी, डेट और हाइब्रिड म्यूच्यूअल फंड्स|

Table of Contents

म्यूच्यूअल फंड क्या होता हैं (What is Mutual Fund)

म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) के अन्दर निवेशक (Investor) अपना पैसा एसेट मैनेजमेंट कंपनी को देते है जिनमे एक फण्ड मेनेजर होता है जो फण्ड खोजकर्ताओ (Fund Researchers) के साथ काम करता है और यह फण्ड मेनेजर पैसे के रख-रखाव में बहुत ज्यादा योग्य होता है और यह अपनी उतम टीम के साथ काम करता है जो की हर समय मार्किट के उतार चदाव पर नज़र रख रही होती है|

यह एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपके पैसे को सही जगह पर लगाती है और इसके बदले आपसे बहुत कम पैसा लेती है यह कंपनी इन्वेस्टर से लगभग 1-2% तक पैसा लेती है और बाकि कमाई का सारा पैसा इन्वेस्टर को रिटर्न कर देती है| म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) का ज्यादातर पैसा शेयर मार्किट में लगाया जाता है इसीलिए इसमें भी रिस्क होता है|

म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार (Types of Mutual Funds)

Types of mutual funds म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार
Types of mutual funds

म्यूच्यूअल फंड्स को मुख्यत तीन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है जो निम्नलिखित है:

  • सम्पति वर्ग पर आधारित (Based on Assets Class)
  • संरचना पर आधारित (Based on Structure)
  • फण्ड प्रबंधन पर आधारित (Based on Fund Manage)

सम्पति वर्ग पर आधारित (Based on Assets Class)

म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार types of mutual funds
म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार

सम्पति वर्ग पर म्यूच्यूअल फंड्स को तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है जो निम्नलिखित है:

  • इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)
  • डेट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund)
  • हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड (Hybrid Mutual Fund)

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड (Equity Mutual Fund)

इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में आप कंपनी के शेयर बाजार (Stock Market) में इन्वेस्ट करते है इसीलिए यहाँ पर आपको रिस्क भी ज्यादा होता है और ये म्यूच्यूअल फंड्स आपको ज्यादा रिटर्न्स भी दे सकते हैं|

इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में आप जिस कंपनी को इन्वेस्ट करने के लिए अपने पैसे देतें है वो आपके पैसे को 50-80 अलग अलग कम्पनियों के शेयर खरीदने में निवेश करती है जिससे आपके पैसे डूबने या ज्यादा हानि होने का रिस्क कम हो जाता है

क्योकि मान लीजिये अपने इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स में पैसे निवेश किये और एसेट मेनेजमेंट कंपनी ने आपके पैसे को 50 अलग अलग कंपनियों में निवेश किया और उसमे से 5-7 कंपनियों के शेयर घाटे में चले गये तब भी आपको बाकि की कंपनियों के शेयर से मुनाफा मिलेगा और ओसत रिटर्न आपको लाभ ही देंगें|

इक्विटी म्यूच्यूअल फंड्स को फिर से 8 मुख्य भागों में वर्गीकृत किया गया है जो इस प्रकार हैं:

इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार Types of equity mutual funds
इक्विटी म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार
लार्ज कैप फण्ड (Large cap fund)

बड़ी बाजार पूंजी (Large Market Capital) की कंपनियों में निवेश (Invest) करने वाले म्यूच्यूअल फण्ड को लार्ज कैप फण्ड कहते हैं। बड़ी बाजार पूंजी (Large Market Capital) कंपनियां वे कंपनियां होती हैं, जिनकी बाजार पूंजी (Market Capital) 1 लाख करोड़ रूपये से ज्यादा होता है। जैसे की टाटा, रिलायंस, आदि बड़ी कंपनियां|

लार्ज कैप कंपनियां काफी पुरानी और बहुत बड़ी कंपनियां होती है और मार्केट में काफी ज्यादा मसहुर होती हैं। यहां तक कि ज्यादातर लार्ज कैप कंपनियां अपने-अपने सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियां होती हैं।

वित्तीय संकट (Financial Crisis) के दौरान भी लार्ज कैप कंपनियों के पास संपत्ति का अपार खजाना रहता है और इसलिए लार्ज कैप कंपनियों में स्माल कैप और मिड कैप कंपनियों से कम रिस्क होता है। ये कंपनियां पहले ही सफल हो चुकी रहती है और इसलिए इन कंपनियों में विकास की संभावनाएँ (Growth Possibilities) भी काफी कम होती है।

मिड कैप फण्ड (Mid Cap Fund)

ऐसी कंपनियां जिनकी बाजार पूंजी (Market Capital) 5 हजार करोड़ से ज्यादा तथा 1 लाख करोड़ रूपये से कम होता है मिड कैप कंपनियां कहलाती है और इन कंपनियों में निवेश करने वाले फंड्स मिड कैप फण्ड कहलाते हैं|

मिड कैप फण्ड में ग्रोथ की संभावनाएं भी ज्यादा नही होती और इनमे रिस्क भी ज्यादा नही होता| इन फंड्स की ग्रोथ और रिस्क दोनों ही लार्ज कैप फण्ड और स्माल कैप फण्ड के ग्रोथ और रिस्क के बिच में आते हैं

स्माल कैप फण्ड (Small Cap Fund)

ऐसी कंपनियां जिनकी बाजार पूंजी (Market Capital) 5 हजार करोड़ रूपये से कम होती है स्माल कैप कंपनियां कहलाती है और इन कंपनियों में निवेश करने वाले फंड्स स्माल कैप फण्ड कहलाते हैं|

स्माल कैप फण्ड में ग्रोथ की संभावनाएं भी काफी ज्यादा नही होती और इनमे रिस्क भी काफी ज्यादा होता क्योकि ये कंपनियां नयी कंपनियों होती है और अभी ग्रोथ कर रही होती हैं|

इसलिए अगर ये कंपनी ग्रोथ करती हैं तो काफी ज्यादा ग्रोथ कर सकती हैं और काफी ज्यादा मुनाफा दे सकती हैं और जैसे की ये नयी कंपनियां होती है तो ये कंपनियां डूब भी सकती हैं क्योकि ये मार्किट में उतनी मसहुर नही होती है| इस तरह की छोटी कंपनियों का फेलियर रेट भी बहुत ज्यादा होता है|

सेक्टर फण्ड (Sector Fund)

किसी एक ही सेक्टर में निवेश करने वाले फंड्स सेक्टर फण्ड कहलातें है इन फंड्स में काफी जोखिम होता है क्योकि जिस विशेष सेक्टर में आपने अपना पैसा लगाया है और वो उस समय ग्रोथ ही नहीं कर रहा हो तो आपको नुकसान हो सकता है|

इसलिए सेक्टर फण्ड में काफी रिस्क है| जैसे कुछ कुछ फण्ड संचार पर ही निवेश करते हैं और कुछ फण्ड केवल फार्मा में ही निवेश करते हैं|

डाइवर्सिटी इक्विटी फण्ड (Diversify Equity Fund)

ये फण्ड बहुत तरह के सेक्टर में एक साथ पैसा निवेश करते हैं और ये फंड्स अलग अलग तरह की बाजार पूंजी (Market Capital) कंपनियों में निवेश करते हैं इसलिए इनमे रिस्क काफी कम होता है|

डिविडेंट यील्ड स्कीम (Dividend Yield Scheme)

डिविडेंट यील्ड स्कीम (Dividend Yield Scheme) में कम्पनियां अपने कमाए गए लाभ का कुछ हिस्सा कंपनी के निवेशकों (Shareholders) को देती है और इसे ही लाभांश (Dividend) कहते हैं। लाभांश (Dividend) देना किसी भी कंपनी के जरूरी नहीं होता है।

निवेशकों (Shareholders) को लाभांश (Dividend) देना है या नहीं, यह फैसला कंपनी के निदेशक मंडल लेते हैं। Dividend Yield Fund स्थाई, सुरक्षित और कम बदलने वाली कंपनियों में इनवेस्ट करते हैं, यहां से Mutual Fund को अच्छा लाभांश (Dividend) मिल जाता है।

ELSS (Equity linked Saving Scheme)

ELSS एक टैक्स बचाने की स्कीम है इस स्कीम में पैसा इन्वेस्ट करके आप टैक्स बचा सकते हैं और फण्ड में निवेश करके आप सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रूपये तक बचा सकते हैं परन्तु इस फण्ड में आपका पैसा 3 साल के लिए बंद हो जाता है अर्थार्त इस फण्ड में अपने एक बार पैसा निवेश किया तो आप 3 साल के बाद ही उसको निकल सकते हैं|

थीमेटिक फण्ड (Thematic Fund)

थीमेटिक फण्ड (Thematic Fund) एक तरह की थीम में इन्वेस्ट करता है जैसे उदहारण के लिए LNT Infrastructure थीमेटिक फण्ड केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुडी चीजो में निवेश करते है जैसे सीमेंट, स्टील और लोहा इत्यादि|

डेट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt Mutual Fund)

डेट फण्ड में सरकार या कंपनिया एसेट मेनेजमेंट कोम्पोंयियो से पैसा उधर लेती है और उसका ऋण अदा करती हैं| इसलिए इनमे लगभग एक फिक्स्ड रिटर्न ही मिलता है और ऐसे फण्ड में रिस्क भी बेहद कम रहता है| अगर आप म्यूच्यूअल फंड्स में इन्वेस्ट करना चाहते है और रिस्क बिलकुल भी नहीं लेना चाहते तो डेट फंड्स आपके लिए सबसे उत्तम है परन्तु इनमे रिटर्न काफी कम मिलता है|

निवेश: ये नियत आय (Fixed Income) प्रतिभूतियों (Securities) जैसे सरकारी प्रतिभूतियां या बॉन्ड, कॉमर्शियल पेपर या डिबेंचर, डिपॉज़िट के बैंक सर्टीफिकेट और ट्रेजरी बिल, कॉमर्शियल पेपर जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं।

रिस्क तथा रिटर्न: डेट फण्ड में रिस्क बहुत कम होता है, इस तरह के फंड्स में निवेश करना काफी सुरक्षित माना जाता है और आय निर्माण के लिहाज से उपयुक्त होते हैं लेकिन इनमे इक्विटी फंड्स की तुलना में रिटर्न काफी कम मिलता है और इक्विटी की तुलना में रिस्क भी बेहद कम होता है| इस तरह के फंड्स में हमे 7-8% तक फिक्स्ड रिटर्न मिलता है|

उदाहरण: डेब्ट फंड्स में लिक्विड, लघु अवधि, फ्लोटिंग दर, कारपोरेट ऋण, डायनामिक बॉन्ड, गिफ्ट फंड आदि आते हैं

अवधि: इस तरह के फंड्स अल्पकालिक लक्ष्य (Short Term Goals) के लिए काफी सही माने जाते है क्योंकी भले ही इनमे रिटर्न कम हो परन्तु इनमे रिस्क भी काफी कम होता है

डेट फण्ड को फिर से कई भागों में वर्गीकृत किया गया है जो इस प्रकार हैं:

डेट म्यूच्यूअल फंड्स Debt mutual funds
डेट म्यूच्यूअल फंड्स
गिल्ट फण्ड (Gilt Fund)

जो फंड्स केवल सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा इन्वेस्ट करते है गिल्ट फण्ड कहलाते हैं ये फण्ड सबसे सुरक्षित फंड्स है इनमे आपका पैसा हर कीमत पर वापिस मिलेगा| क्योकि किसी भी देश की सरकार उसकी सबसे भरोसेमंद कंपनी होती होती है, सरकार से ज्यादा कोई भी कंपनी इतनी भरोसेमंद नही हो सकती|

इस फण्ड में आपको हमेशा कुछ ना कुछ फायदा ही होगा और गिल्ट फंड्स दो तरह के फंड्स होते हैं|

जंक बांड स्कीम (Junk Bond Scheme)

जंक बांड स्कीम फंड्स में व्यापारिक बाध्यता (Corporate bonds) में निवेश किया जाता है इस तरह के फंड्स में रिटर्न भी ज्यादा मिलते हैं और इनमे रिस्क भी ज्यादा होता है क्योकि व्यापार में हमेशा से ही उतर चड़ाव देखने को मिलते हैं|

फिक्स्ड मेचोरिटी प्लान (Fixed Maturity Plan)

फिक्स्ड मेचोरिटी प्लान बैंक फिक्स्ड डिपाजिट (FD) की तरह ही होते हैं इनमे पहले से ही मेचोरेटी का समय जैसे 3 साल या 7 साल निर्धारित होता है और इस बीच आप इन्वेस्ट किये गए पैसे को निकाल नही सकते, आपको इसके मेचोरेटी के समय तक इन्तेजार करना पड़ता है|

फिक्स्ड मेचोरिटी प्लान में रिस्क काफी कम होता है और इसका रिटर्न भी बैंक की फिक्स्ड डिपाजिट (FD) से ज्यादा होता है|

फिक्स्ड मेचोरिटी प्लान्स मुख्यत जमा प्रमाणपत्र (Certificate of Deposit), वाणिज्यिक पत्र (Commercial Papers), कॉर्पोरेट बांड (Corporate Bonds) में निवेश करते हैं|

लिक्विड स्कीम (Liquid Scheme)

लिक्विड स्कीम म्यूच्यूअल फण्ड बाजार साधन (Money Market instrument) में निवेश करता है इस फण्ड के जरिये कंपनियां शोर्ट टर्म के लिए निवेशकों से पैसे उधार लेती है|

इस तरह के फंड्स में रिटर्न कम मिलता है परन्तु फिर भी ये फंड्स बैंक सेविंग अकाउंट से ज्यादा रिटर्न देते हैं| इस तरह के फण्ड में रिस्क काफी कम होता है| लिक्विड स्कीम म्यूच्यूअल फण्ड की खास बात ये है की आप कभी भी इनमे से अपना पैसा निकल सकते हैं|

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फंड्स (Hybrid Mutual Fund)

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फंड्स वे फंड्स है जो इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) दोनों तरह के फंड्स में निवेश करते हैं| इस तरह के फंड्स में इक्विटी फण्ड आपके निवेश को ग्रोथ देता है और डेट फण्ड आपके निवेश को सिथिरता प्रदान करता है|

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड वे है जो एक से ज्यादा तरह के फंड्स में पैसा निवेश करते है ये फण्ड इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) दोनों तरह के फंड्स से मिलकर बनाये जाते हैं|

निवेश: ये इक्विटी और डेब्ट फंड्स दोनो में ही निवेश करते हैं, इक्विटी फंड्स इसको वृधि प्रदान करते है और डेब्ट फंड्स इनको सिथिरता (Stability) प्रदान करते है

रिस्क तथा रिटर्न: इक्विटी और डेब्ट फंड्स दोनों में ही हाइब्रिड फंड्स का निवेश होने के कारण हाइब्रिड फंड्स वृद्धि संभावनाओं के साथ-साथ आय निर्माण भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।

अवधि: हाइब्रिड फंड्स में आप लघु अवधि (लघु अवधि) और दीर्घावधि (Long Term) दोनों ही के लिए आप इसमें इन्वेस्ट कर सकते है|

उदाहरण: कंसरवेटिव बैलेन्स्ड फंड, एग्रेसिव बैलेन्स्ड फंड, पेंशन फंड, चाइल्ड प्लान और मासिक आय योजना आदि इसके उदाहरण हैं।

हाइब्रिड फण्ड के प्रकार (Types of Hybrid Funds)

हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार TYPES OF HYBRID MUTUAL FUNDS
हाइब्रिड म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार
MIP Monthly Income Plan

इस फण्ड का ज्यादातर हिस्सा लगभग (60-90%) डेट फण्ड (debt फण्ड) में निवेश किया जाता है और बाकि का हिस्सा इक्विटी फण्ड में निवेश किया जाता है| इसलिए ये फण्ड इक्विटी की तुलना में कम रिस्क वाले होते हैं|

इस म्यूच्यूअल फण्ड का कुछ हिस्सा (10-40%) डेट फण्ड (debt fund) में निवेश किया जाता है इसलिए इसके अंदर कुछ हद तक तक रिस्क भी होता है

बैलेंस्ड फण्ड (Balanced Fund)

इस फण्ड का ज्यादातर हिस्सा लगभग (60-80%) इक्विटी फण्ड में निवेश किया जाता है और बाकि का हिस्सा डेट फण्ड (debt फण्ड) में निवेश किया जाता है| इसलिए ये फण्ड ज्यादा रिस्क वाले होते हैं और ज्यादा रिटर्न देने का भी सामर्थ्य रखते है|

बैलेंस्ड फण्ड (Balanced Fund) में बाकि का हिस्सा डेट फण्ड में निवेश किया जाता है|

आर्बिट्राज फण्ड (Arbitrage Fund)

ये फण्ड बदलती हुई शेयर मार्किट में निवेश करके मुनाफा कमाते हैं| इस फण्ड का ज्यादातर हिस्सा इक्विटी फण्ड में निवेश किया जाता है| इसका लगभग 70% हिस्सा इक्विटी में निवेश किया जाता है|

इस फण्ड में निवेश किया गया पैसा सुरक्षित तो रहता है लेकिन इसमें मिलने वाले रिटर्न में काफी उतार चढ़ाव आते रहते हैं|

इस फण्ड के रिटर्न 6-10% तक रिटर्न देते हैं|

संरचना के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार

संरचना के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड
संरचना के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड

संरचना के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड को दो प्रकार से बांटा गया है

ओपन एंडेड (Open Ended)

इस तरह के फंड्स को आप कभी भी बेच और खरीद सकते है| हम आपको बता दे की ज्यादातर म्यूच्यूअल फंड्स ओपने एंडेड होते हैं|

ओपन एंडेड म्यूच्यूअल फंड्स असीमित यूनिट जारी कर सकते हैं|

क्लोज्ड एंडेड फंड्स (Closed Ended)

क्लोज्ड एंडेड फण्ड को आप उसके मेचोरिटी समय के पूरा होने के बाद ही बेच सकते है, इस फण्ड के क्रेता या विक्रेता बहुत कम मिलते है क्योकि इस फण्ड की लिक्विडिटी बहुत ही कम है|

बहुत ही कम फण्ड क्लोज्ड एंडेड फंड्स होते है इनके फंड्स एक तय यूनिट तक ही फण्ड आते हैं| इस तरह के फण्ड में आप तभी निवेश कर सकते है जब ये अपना नया फण्ड ऑफर (NFO) लेकर आते हैं|

फण्ड प्रबंधन के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार

फण्ड प्रबंधन के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार
फण्ड प्रबंधन के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार

फण्ड प्रबंधन के आधार पर म्यूच्यूअल फण्ड दो प्रकार के होते हैं तो चलिए अब इनके बारे में भी विस्तार से जान लेते हैं:

सक्रिय प्रबंधन (Actively Managed)

एक सक्रिय रूप से प्रबंधित निवेश फण्ड (actively managed investment fund) एक ऐसा फण्ड है जिसमें एक प्रबंधक या एक प्रबंधन टीम यह निर्णय लेता है कि फण्ड के पैसे का निवेश कैसे करना है। सक्रिय फंड बाजार सूचकांक को हरा सकते हैं|

कई सक्रिय रूप से प्रबंधित निवेश फंडों को भारी रिटर्न देने के लिए जाना जाता है, लेकिन निश्चित रूप से प्रत्येक फंड का प्रदर्शन समय के साथ बदलता है, इसलिए निवेश करने से पहले फंड के इतिहास को पढ़ना महत्वपूर्ण है।

कई जानकारों की यह धरना है कि ज्यादातर सक्रिय रूप से प्रबंधित फंड बेहद कमजोर प्रदर्शन करते हैं और कई बार ये बाजार सूचकांक से भी बदतर प्रदर्शन करते हैं

निष्क्रिय प्रबंधन (Passively Managed)

सक्रिय रूप से प्रतिबंधित फण्ड के विपरीत निष्क्रिय प्रबंधित फंड एक बाजार सूचकांक का अनुसरण करता है। इसमें निवेश के निर्णय लेने वाली कोई प्रबंधन टीम नहीं होती है|

इस फण्ड के रिटर्न इंडेक्स पर निर्भर करते है और इसका इंडेक्स निफ्टी या सेंसेक्स में से किसी में भी किया जा सकता है|

कुछ अन्य म्यूच्यूअल फंड्स

ऊपर बताये गए सभी फंड्स के प्रकार के आलावा भी म्यूच्यूअल फंड्स कई प्रकार के होते है और ऐसे कई फंड्स के नाम निम्नलिखित हैं:

  • International Fund
  • Real estate Fund
  • Gold Fund
  • Exchange Trader Fund

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दोस्तों उमीद करते है कि आपको म्यूच्यूअल फंड्स के सभी प्रकार के फंड्स के बारे में पता चल गया होगा अगर आप म्यूच्यूअल फण्ड खरीदना चाहते है तो यह पोस्ट आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगी|